Friday, June 17, 2011

लादेन को " ओसामा जी " कहने वाले

 माननीय अन्ना, बाबा पर झूठ बोलने व धोखा देने के आरोप लगाने वाले दिग्विजय सिंह ने पहले P.M. लोकपाल के आधीन हो कहा फिर पलट कर देश को झूठ बोल कर धोखा क्यों दिया ? जिस तरह कांग्रेस नेता संसदीय लोकतंत्र का बार-बार हवाला देकर अन्ना पर हमला कर रहे हैं ठीक ऐसे ही बलबीर पुंज ने वैसा ही हमला " राष्ट्रिय सलाहकार परिषद् " व उसके सदस्य "हर्षमंदर, अरुणा राय " पर किया है . अर्जुन शर्मा ने भी परिषद् से जुड़े  " मंदर, तीस्तासितलवर, जोन दयाल पर " आरोप लगाए. लादेन को " ओसामा जी " कहने वाले दिग्विजय सिंह अपने आप को " ईमानदार, सच्चे व भ्रष्टाचार विरोधी " अथवा अपनी जुबान के धनी मानते हैं तो जनलोकपाल को सरकार से मनवाने के लिए सरकार पर जोर डाले या बे सिर-पैर वाले बयान देकर देश को गुमराह करना बंद करे.

Thursday, June 16, 2011

जब स्वामी निगमानंद जी लम्बे अरसे तक अनशन पर रहे तब मीडिया कहां था ?

1. स्वामी निगमानंद जी की मौत के बाद रोना रोने वाला मीडिया क्या देश को बताने का कष्ट करेगा कि जब स्वामी जी लम्बे अरसे तक अनशन पर रहे तब कहां था ? अब रोना रोने के बजाए उन मीडिया कर्मियों के विरूद्ध सख्त कारवाई की जाए जिनके एरिया में अनशन किया गया. मीडिया बिकाऊ है के आरोप बहुत पहले लग चुके हैं. ऐसे में ज़रूरी हो जाता है कि मीडिया कि वास्तविक स्थिति की जांच स्वयं मीडिया CBI से करवाए. हो सकता है इनकी माफिया से सांठ-गांठ हो. चाहे न हो फिर भी उस इलाके के मीडिया कर्मी अपनी जिम्मेदारी से बच नही सकते.
2. अजीब विडंबना है पत्रकार " डे " के लिए जहां मीडिया ज़मीन आसमान एक कर रहा है वहीं एक अन्य पत्रकार के शव मिलने पर चुप है. यह तो वैसा ही है जैसे कांग्रेस " अन्ना व बाबा " के अनशन का विरोध कर रही है तथा निगमानंद जी प्रकरण में जमीन-आसमान एक करने में लगी है.
3. अन्ना के " लोकपाल " ने उन नेताओं व पार्टी की पोल खोल दी जो भ्रष्टाचार को समाप्त करने हेतु बयान तक सीमित हैं.
4. अखबार पंजाब केसरी हिसार में छपी ख़बर " लोकसभा अध्यक्ष ने PAC रिपोर्ट वापिस लौटा कर PAC अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी को झटका दिया " निंदनीय है. अखबार का काम ख़बर देना है न कि ख़बर बनाना. फिर भी अखबार इसे झटका मनाता है तो वास्तव में यह देश व ईमानदारी को झटका है क्योंकि इसमें " एटोर्नी जनरल, केबिनेट सचिवालय व PMO " तक को कटघरे में खड़ा किया गया है. ख़बर से तो दाल में काला है की आशंका हो रही है. सत्य क्या है अखबार जाने.    

Tuesday, June 14, 2011

देश को बताये कि क्या दमन कारवाई से पहले आम सहमति बनाई गई थी ?.

सिरसा 14 जून 2011.
1. कृप्या आप आज के " पंजाब केसरी जालन्धर " में छपे " अर्जुन शर्मा " के लेख " अब अपराध में भी आरक्षण देने की तैयारी " पढ़ें व अपने विचार से देश  को अवगत करवाएं.
2. कांग्रेस ने पुलिस दमन से पहले बाबा को अपना मुखोटा बनाने के हर संभव प्रयास किए. यहाँ तक कि बाबा के समर्थन में कांग्रेस नेता कमलनाथ का बयान भी आया , सफलता नही मिली तो RSS , BJP का मुखोटा का प्रचार शुरू कर दिया. जाहिर है 125 साल पुरानी कांग्रेस वास्तव में पुरानी हो गई.
3. लोकपाल बिल पर आम सहमति की बात करने वाली सरकार देश को बताए कि दमन कारवाई से पहले आम सहमति बनाई गई थी ?

Monday, June 13, 2011

सिरसा 13 जून 2011



1. लोकपाल दायरे में किन को आना चाहिए बारे सिविल सोसाइटी सही है का समर्थन कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने बयान दे कर दिया.
2. पुलिस कारवाई में सरकार दोषी है के बारे कांग्रेस नेता श्री साथे व मणिशंकर अय्यर के बयानों से स्पष्ट है.
3. सरकार भ्रष्टाचार निवारण व काला-धन वापसी व जन लोकपाल बारे कितनी उदासीन या गंभीर है वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के बयान " बिल कब पारित होगा की कोई गारंटी नही " से स्पष्ट हो जाता है.
4. BJP सरकार के समय कांग्रेस ने जोर दिया कि PM लोकपाल दायरे आधीन हो. अब विरोध कर रही है.
5. अन्ना व बाबा " BJP, RSS " मुखौटा है का आरोप लगाने वाली सरकार परमाणु संधि हेतु मदद लेकर खुद मुखौटा क्यों बनी ? जाहिर है सरकार कि हालत "खिसयानी बिल्ली खम्बा नोचे " वाली हो चुकी है.
6. CWG घोटाले पर बोलने वाले मणिशंकर अय्यर ने भ्रष्टाचार विरोधी अन्ना व बाबा के आन्दोलन को सर्कस कह कर अपनी स्वार्थी सोच की पोल खुद ही खोल दी.
7. कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह का प्रहार वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी पर इतना तेज था कि दादा ने अब दिग्विजय सिंह व अम्बिका सोनी की बोली बोलनी शुरू कर दी.

Sunday, June 12, 2011

सरकार अलगाववादी से तो बात कर सकती है


 4 जून की घटना ने अपने आप तानाशाह गद्दाफी का बिना मांगे समर्थन कर दिया. अब सरकार को देश विदेश में बहुत कुछ सहन करना पड़ सकता है. कितनी अजीब बात है " सरकार अलगाववादी व माओवादियों " से तो बात कर सकती है लेकिन देशहित में कालाधन व भ्रष्टाचार के विरोध में अनशन करने वालों से नहीं. फिर भी दुहाई लोकतंत्र की ही दी जा रही है.